होलिका की याद में त्याग दिए अपने प्राण, जानिए इलोजी महाराज की प्रेम कहानी का पूरा सच

राजस्थान के कई शहरों और गांवों में आज भी लोकदेवता इलोजी महाराज की पूजा की जाती है.

इलोजी, हिरण्यकश्यप की बहन होलिका से प्रेम करते थे और शादी के बंधन में बंधने ही वाले थे.

होलिका को आग से न जलने का वरदान था. इसी वरदान के कारण  होलिका ने अपने भतीजे प्रहलाद के साथ अग्नि में प्रवेश कर लिया था।

इलोजी ने होलिका की राख को अपने शरीर पर मल लिया। इलोजी ने ताउम्र शादी भी नहीं की।

इलोजी लोक देवता के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं मिलता, वे यहां मन्नत मांगती हैं।

आमली एकादशी पर धानमंडी में तणी बांधने के बाद दोनों मंदिरों में इलोजी की प्रतिमा को पाठा बिठाने की रस्म होती है।