कहाँ से शुरू हुई थी होलिका दहन की परंपरा, कहानी जानकर रह जाएंगे दंग

हिंदू धर्म में होलिका दहन करने के पीछे पौराणिक मान्यता जुड़ी हुई है। होली से ठिक एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है,

हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रहलाद को इसलिए नापसंद करता था क्योंकि प्रहलाद विष्णु जी के परम भक्त थे.

जिस दिन होलिका अग्नि में भस्म हुई थीं वह दिन फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि और समय प्रदोष काल था। तब से होलिका दहन की परंपरा चलती आ रही है।

होलिका दहन की परंपरा

झांसी से करीब 70 किलोमीटर दूर एरच कस्बा है. ये वही जगह है, जहां से होली की शुरुआत हुई थी.